दैनिक भाष्कर(पटना) के लोकार्पण में लालू दिखे नीतीश पर भारी 

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“ लालू ने अपने नाम किया ‘ मन ऑफ़ द मैच ‘ का अवार्ड “

आज मैं ( १८.०१.२०१४ को ) दैनिक भाष्कर के , श्री कृष्ण मेमोरियल सभागार ( पटना ) में आयोजित , लोकार्पण समारोह में शामिल हुआ l आज एक अर्से बाद दो धूर राजनैतिक विरोधी श्री लालू प्रसाद यादव और बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार किसी सार्वजनिक मंच पर एक साथ विराजमान थे l इन दोनों की उपस्थिति ही उत्सुकता को बढ़ा रही थी कि आज कुछ अविस्मरणीय तो जरूर होने वाला है l सभागार में मौजूद पत्रकारिता व् अन्य सामाजिक सरोकारों से जुड़े सम्मानित अतिथियों को बस इंतज़ार था इनके सम्बोधन का l संयोगवश लालू जी का , अपने गवंई अंदाज में चलने की अदा के साथ , पदार्पण नीतीश जी से पहले ही हो चुका था l लालू जी अपनी चिर-परिचित भेष-भूषा सर पे गर्म-टोपी , ऊनी -कुर्ता , स्वेटर , गले में मफ़लर और पैरों में स्पोर्ट्स-शूज में हाथ जोड़कर व् सर झुकाकर लोगों को अभिवादन करते काफी सहज दिख रहे थे l जमानत से रिहाई के बाद लालू जी की भाव-भंगिमा में विनम्रता का पुट कुछ ज्यादा ही दिखाई देने लगा है ( इसका जिक्र मैंने पहले भी अपने आलेख में किया है ) l कुछ ही क्षणों के बाद नीतीश जी का भी आगमन हुआ चहरे पर हल्की मुस्कराहट लेकिन मुख्यमंत्री वाली ठसक और लाम-काफ के साथ l नीतीश जी की भाव-भंगिमा में नि:संदेह लालू जी वाली सहजता नहीं थी l वैसे भी कुछ अर्से से सार्वजनिक मंचों और समारोहों में नीतीश जी असहज ही दिखते हैं और यहाँ तो एक ऐसे तबके की सर्वाधिक मौजूदगी थी जिसके स्कैनर तले वो सदैव असहज ही दिखते हैं , भले ही उसे साधने में वो काफी हद तक सफल भी हुए हैं l

चलिए आगे बढ़ते हैं लालू जी पर नजर पड़ते ही अचानक नीतीश जी की चहरे की मुस्कान ना जाने कहाँ काफूर हो गयी ! दोनों के बीच ना कोई अभिवादन ना ही दुआ -सलाम हैरान करने वाला मंजर था l इसके बावजूद लालू जी बेपरवाह मुस्कराहट के साथ सहज ही दिखे लेकिन अब तक नीतीश जी की भृकुटि तन चुकी थी l मंच पर इन दोनों महारथियों के बीच भारत -सरकार के गृह-मंत्री श्री सुशील कुमार शिंदे जी आसीन थे l बिहार के दोनों धुरंधरों के बीच की तल्खी को शायद उनकी पारखी नजरें भांप चुकी थीं और वो लालू और नीतीश दोनों के साथ परस्पर बातचीत में मशगूल हो कर माहौल को सहज करने की कोशिश में दिखे l

आवश्यक औपचारिकताओं के बाद लालू जी अपने सम्बोधन की शुरुआत के साथ लोगों से रूबरू हुए l वही पुरानी चिर-परिचित भाषा और शैली , गम्भीर मसलों को भी मजाकिया लहजे में पेश करते हुए अपनी रौ में आते दिखे लालू जी l ठहाकों के बीच खुद भी खिलखिलाते हुए नि:संदेह एक समाँ बाँध दिया लालू जी ने l पूरा सभागार ठहाके लगा रहा था , तालियां बज रहीं थीं लेकिन सभागार में एक ऐसा भी शख्स था जिसका चेहरा तनाव से तना जा रहा था l आप सब समझ ही चुके होंगे कि वो शख्सियत कौन थी !!

लालू जी ने आज किसी को भी नहीं बख्शा प्रेस की निष्पक्षता की बात की , बिहार की दरबारी मीडिया पर भी ताने कसे , बिहार की मीडिया के सन्दर्भ में मार्कण्डेय काटजू के बहुचर्चित बयान का भी जिक्र किया , अपने शासन काल में मीडिया की भूमिका का भी जिक्र ये कहकर किया कि “जितनी गालियाँ उन्हें और राबड़ी देवी को दी गयीं वो अगर आज के शासन काल में दीं जाएं तो अनर्थ हो जाएगा “, सोशल मीडिया की अहमियत को भी अपने अनूठे अदांज में पेश किया , मीडिया में सरकारी विज्ञापनों से पनप रहे दुष्प्रभाव का जिक्र किया l सभागार में उपस्थित पूर्व -लालू भक्तों ( अब सत्ताधारी दल के मंत्रियों और विधायकों ) को भी , भूतपूर्व गृह-सचिव श्री आर.के.सिंह का उदाहरण श्री सुशील कुमार शिंदे जी को सम्बोधित कर देते हुए , ये कहकर लपेटा कि “अब ज़माना आदमी को ठोक- बजा के देख लेने के बाद सटाने का है l”

लालू जी ने अपने सम्बोधन में प्रिंट -मीडिया को एक अति-महत्वपूर्ण सलाह भी दे डाली , उन्होंने खबरों की पहुँच के दायरे को विस्तृत करने की प्रासंगिकता और सार्थकता को अपने लहजे में बखूबी समझाया l विशेष -राज्य के मुद्दे पर भी नीतीश जी और मीडिया पर उन्होंने सटीक चुटकी ली l लालू जी के पूरे सम्बोधन के दरम्यान एक बार भी नीतीश जी के चहरे पर दिखावे की मुस्कुराहट भी नदारथ थी l आज लालू जी के पूरे सम्बोधन को सुन कर ये जरूर लगा कि ऐसे मौकों का भरपूर फायदा कैसे लिया जाता है इस कला में लालू सरीखा राजनेता आज कम ही दिखता है l आज उन्होंने राजनीति भी की , निशाने भी साधे और लोगों को बांधे भी रखा l आज शायद पूरा होम-वर्क कर के आए थे लालू !

लालू जी के सम्बोधन के बाद बारी आयी श्री सुशील कुमार शिंदे जी के सम्बोधन की , उनके औपचारिक , स्टीरियो- टाइप और उबाऊ सम्बोधन के बाद नीतीश जी के सम्बोधन का सबों को बेसब्री से इंतजार था l सबों की उत्सुकता थी कि लालू जी को कैसे काउंटर करते हैं नीतीश जी !! एक मुख्यमंत्री के सम्बोधन की परिपाटी निभाने के बाद नीतीश जी ने भी लालू पर निशाना साधा और लालू जी के ट्विटर पर जुड़ने के प्रसंग पर कुछ खिसियानी टिप्पणियां कीं l इन टिप्पणियों में ना तो व्यंग्य व् कटाक्ष का कोई पुट था ना ही लालू वाली सहजता l कुछ चिड़चिड़ाए और खीजे दिखाई दे रहे थे बिहार के मुख्यमंत्री l मीडिया पर अपने नियंत्रण के सच को झुठलाते हुए भी दिखे नीतीश जी l “चोर की दाढ़ी में तिनके” वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए नीतीश जी ने भाष्कर-समूह के अध्यक्ष श्री रमेश चन्द्र अग्रवाल को यहाँ तक कहा डाला कि “आप ना ही मुझ से जुडी खबरों को और ना ही मेरी तस्वीरों को छापिएगा, क्यूंकि मुझ पर ये इल्जाम लगता है कि बिहार से प्रकाशित होने वाले अखबारों में मैं ही छाया रहता हूँ l” नीतीश जी के इतना कहते ही लालू जी ने बीच सम्बोधन में नीतीश जी को टोकते हुए कहा ” अगर आपको नहीं छापेंगे तो यहाँ इनका अखबार बंद हो जाएगा l” पूरा सभागार ठहाकों से गूँज उठा l यहाँ भी लालू जी ने बाजी अपने नाम कर ली l नीतीश जी के शब्द-बाणों के बीच भी लालू जी मुस्कुराते , सर हिलाते और तालियां बजाते दिखे , ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे क्रिकेट के मैच में अंतिम ओवरों में जब बल्लेबाजी कर रही टीम को २०-२५ रन प्रति ओवर की औसत से रन बनाने होते हैं और बल्लेबाज इक्का-दुक्का चौके -छक्के भी मार रहा होता है तो गेंदबाजी कर रही टीम का कप्तान ये जान रहा होता है कि मैच तो मैंने अपने नाम कर ही लिया है “ भांज लो जितना बैट भांजना है l“ सच कहूँ तो एक समाचार -पत्र के लोकार्पण के बहाने खुले मंच पर दो दिग्गज राजनेताओं के बीच एक अविस्मरणीय खुली बहस (मुकाबले ) के साक्षी बने सभागार में मौजूद ढाई हजार प्रबुद्ध-जन और मैं l निःसंदेह आज के मुकाबले में लालू जी ने अपने नाम किया “मन ऑफ़ द मैच ” का अवार्ड l