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  1. […] यात्रा समाचार – यात्रा हेडलाइंस, कहानियांयुवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेका… […]

  2. Shailesh.G.Patel
    Aug 19 - 2:04 pm

    suggest to read the best good book of SWAMI VIVEKANAND or any other

  3. amit pathak
    Sep 29 - 12:34 pm

    the greate personality s.v. nand ji produce feeling about hindusm ,wat’s power of ramayan,gita,vedanta of hindu religion……

  4. amit yadav
    Dec 02 - 5:01 pm

    swami vivekanand for religion is gyanyog

  5. sonakshi sharma
    Jan 15 - 2:27 pm

    a god article

  6. Yudhvir Singh Lamba "Bhartiya"
    Dec 25 - 1:42 pm

    स्वामी विवेकानंद युवाओं के प्रेरणास्त्रोत, आधुनिक भारत के एक महान युवा संन्यासी और एक आदर्श व्यक्तित्व के धनी थे । स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी सन् 1863को कलकत्ता में एक कायस्थ परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। पिता विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाईकोर्ट के एक प्रसिद्ध वकील थे। स्वामी विवेकानंद संत रामकृष्ण के शिष्य थे और वर्ष 1897 में उन्होंने रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन की स्थापना की।

    विश्वभर में जब भारत को निम्न दृष्टि से देखा जाता था, ऐसे में स्वामी विवेकानंद ने 11 सितंबर, 1883 को शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में हिंदू धर्म पर प्रभावी भाषण देकर दुनियाभर में भारतीय आध्यात्म का डंका बजाया। उन्हें प्रमुख रूप से उनके भाषण की शुरुआत “मेरे अमरीकी भाइयो एवं बहनों” के साथ करने के लिये जाना जाता है। उनके संबोधन के इस प्रथम वाक्य ने सबका दिल जीत लिया था।

    देशवासी स्वामी विवेकानंद के जीवन और उनके विचारों से प्रेरणा लें।

    स्वामी विवेकानंद जी कठोपनिषद का एक मंत्र कहते थे:
    “उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत ।”
    उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक अपने लक्ष्य तक ना पहुँच जाओ।

    युद्धवीर सिंह लांबा “भारतीय” (Yudhvir Singh Lamba Bharatiya)
    हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नालॉजी,
    बहादुरगढ़, झज्जर, हरियाणा मे प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।

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